मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता ने 17 जुलाई को लगभग 80 मिनट का भाषण देश के सामने झोंक दिया। बिहार में गुप्ता में सरनेम वालों को सावजी ही कहा जाता है। चुनाव आयुक्त की प्रेस वार्ता में 21 पत्रकारों ने लगभग 50 सवाल पूछे। अधिकतर सवाल हिंदी में ही थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने सभी प्रश्नों का उत्तर हिंदी में ही दिये।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि देश में किसी भी पार्टी का जन्म चुनाव आयोग के प्रसव गृह में ही होता है। मतलब पार्टी का पंजीयन चुनाव आयोग में ही होता है। पार्टियों को मान्यता भी आयोग ही देता है। पीसी के दौरान अधिकांश सवाल मतदाता सूची में गड़बड़ी से जुड़े हुए थे। बिहार में हो रहे एसआईआर की प्रक्रिया में भी मतदाता सूची में गड़बड़ी बड़ा मुद्दा है। महाराष्ट्र में दो चुनाव के बीच 45 लाख वोटरों की अप्रत्याशित वृद्धि मतदाता सूची में गड़बड़ी से जुड़ा था। इस सवाल पर आयोग ने कहा कि मतदाता सूची का ड्राफ्ट और अंतिम सूची बनाने के बीच बड़ी भूमिका बीएलए (पार्टियों की ओर से बूथ स्तर पर नामित कार्यकर्ता) की होती है और उनकी स्वीकृति और लिखित सहमति के बाद ही प्रकाशित होती है। बीएलओ (सरकारी कर्मचारी) पार्टियों के कार्यकर्ताओं की भी मदद लेता है। यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो राजीतिक दल इसकर जिम्मेवारी से मुक्त नहीं हो सकते हैं।
बिहार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 1 लाख 60 हजार से अधिक बीएलए 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के हैं। इन पार्टियों के जिलाध्यक्षों के माध्यम से प्रारूप सूची बीएलए तक पहुंचायी गयी है। सूची निर्माण की पूरी प्रक्रिया में बीएलए की भूमिका होती है। बीएलए स्थानीय कार्यकर्ता और बूथ के वोटर होते हैं। इसलिए लिस्ट में गड़बड़ी की गुंजाईश नहीं है। महाराष्ट्र के संदर्भ में कहा कि यह गड़बड़ी पार्टियों को रिजल्ट आने के बाद ही दिखती है, जबकि वोटर लिस्ट चुनाव से पहले ही जारी कर दी जाती है।
अपनी प्रेस वार्ता के दौरान ज्ञानेश गुप्ता ने अनुच्छेद और आंकड़ों के माध्यम से अपनी ताकत बताते रहे और जनता को यह भरोसा भी दिलाया कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम नहीं कटेगा। उन्होंने पार्टियों एवं लोगों से दावा और आपत्ति आवेदन देने और दिलवाने का आग्रह भी किया। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक भी अहसज करने वाले प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया। जब पत्रकारों ने राहुल गांधी और अनुराग ठाकुर द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत से जुड़े सवाल पूछे तो अनसुना कर दिया। लेकिन बाद में राहुल गांधी के संदर्भ में कहा कि शपथ देकर आरोप लगाएं। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो मतलब है कि उनका आरोप निराधार है और उन्हें देश से माफी मांगना चाहिए।
आयोग की प्रेस वार्ता बिहार के एसआईआर से जुड़ा थी, लेकिन बिहार को लेकर मीडिया में चल रहे आरोप और आम लोगों की परेशानी हाशिये पर रही। पीसी में पहुंचे पत्रकारों में शायद ही कोई बिहार से था। जो लोग सवाल पूछ रहे थे, वे भी सिर्फ मीडिया के आरोप के संदर्भ में उपजे सवाल ही थे। ऐसे पत्रकारों को बिहार की जमीनी हकीकत से वास्ता नहीं था। वे आयोग की लठैली से परिचित नहीं थे। मुख्य चुनाव आयुक्त को दिल्ली के बजाये पटना में आकर पीसी करना चाहिए, तब ज्यादा व्यावहारिक सवाल भी उठेंगे और आयोग वस्तुस्थिति से अवगत भी हो पाएगा।










