मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं निशांत। बिहार की राजनीतिक शब्दावली में जातीय पहचान के लिए उन्हें निशांत पटेल भी कह सकते हैं। मुख्यमंत्री के पुत्र राजनीति में आएंगे या नहीं, इसका फैसला पिता नीतीश कुमार नहीं कर रहे हैं। बल्कि नीतीश कुमार के दरबारी संजय झा और विजय चौधरी कर रहे हैं। इनकी इच्छा है कि निशांत पटेल राजनीति में आएं, ताकि नये राजा के दरबार में उनकी कुर्सी सुरक्षित रहे। जदयू के सवर्ण नेताओं को अपने अस्तित्व का डर सता रहा है। इसलिए निशांत की छाया चाहते हैं। इन दोंनों के अलावा अन्य सवर्ण दरबारियों ने चाह लिया है तो निशांत जरूर नवंबर में विधायक बन जाएंगे। इसकी पूरी संभावना है।

अब सवाल है कि निशांत पटेल कहां से चुनाव लड़ेंगे। दरबारियों की इच्छा है कि निशांत पटेल राजधानी पटना की दीघा सीट से चुनाव मैदान में उतरें। इस सीट पर कुर्मी का प्रभाव माना जाता है। 2010 में इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद यहां से पहली विधायक पूनम देवी पटेल बनी थीं। 2015 से संजीव चौरसिया विधायक हैं। वे पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद की पुत्र हैं। संजीव का सबसे बड़ा पक्ष यही है कि वे पूर्व राज्यपाल के पुत्र हैं। हालांकि विधायक रहते हुए उन्होंने पार्टी में अपनी पहचान बनायी है और अब नयी पहचान की राजनीति भी कर रहे हैं। इस सीट से भाजपा की ओर से फिलहाल कोई दावेदार नहीं हैं, लेकिन जदयू की ओर बिट्टू सिंह नाम के कोई व्यक्ति जोर आजमाईश कर रहे हैं।

राजनीतिक गलियारे की चर्चा के अनुसार, जदयू की सवर्ण लॉबी की दूसरी पसंद की सीट है हरनौत। नालंदा जिले की हरनौत सीट से 1985 में नीतीश कुमार पहली बार विधायक बने थे। 1989 में लोकसभा के लिए चुन लिए गये थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार बाढ़ में चुनाव हार गये थे, जबकि नालंदा से निर्वाचित हुए थे। मतलब नीतीश के लिए नालंदा की जमीन जीवनदायी है। इसलिए उनके पुत्र को भी नालंदा में प्रत्यारोपित करने का प्रयास किया जा रहा है।
हरनौत के वर्तमान विधायक हरिनारायण सिंह नौ बार विधायक रह चुके हैं। अब वे अपने पुत्र को सत्ता हस्तांतरित करना चाहते हैं। वे अपनी उम्र का हवाला देकर बेटे को स्थापित करना चाहते हैं। लेकिन निशांत पटेल की चर्चा शुरू होने के बाद उनकी यह सीट फंस गयी है।
चुनाव को लेकर निशांत पटेल अब तक चुप हैं। उनके चुनाव लड़ने की बात भी आमतौर सवर्ण लॉबी ही करती है। पार्टी में सवर्ण लॉबी ही हावी है और नीतीश कुमार को वही लॉबी घेरे रहती है। सवर्ण लॉबी के अस्तित्व के लिए निशांत का राजनीति में आना जरूरी है। नीतीश के चाहने या न चाहने की बात ही निरर्थक है।
हमारी पुस्तक राजनीति की जाति पार्ट 2 में दर्ज विधान सभावार जातीय आंकड़ों के अनुसार, हरनौत विधान सभा क्षेत्र में कुर्मी वोटरों की संख्या 87000 है। यहां यादव वोटरों की संख्या 53000 है, जबकि चमार 36000 और दुसाध 34 हजार हैं। राजपूत 10000 और भूमिहार 13000 हैं। बिहार के सभी विधान सभा क्षेत्रों में प्रमुख दस जातियों के वोटरों की संख्या को जानने के लिए आप हमारी पुस्तक राजनीति की जाति पार्ट 2 खरीद कर पढ़ सकते हैं। उसकी कीमत 5500 (साढ़े पांच हजार) रुपये है।










