सीमांचल में साम्प्रदायिकता के जरिए वोटों के ध्रुवीकरण के लिए राजद-कांग्रेस ओवैसी को गले लगाने की तैयारी में है। बिहार विधान सभा चुनाव से पहले असुदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रदेश अध्यक्ष ने इसका खुलासा किया है। इनकी कोशिश सीमांचल को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद बनाने की है। सीमांचल के किशनगंज में सबसे अधिक 67 फीसदी मुसलमान वोटर्स हैं। इसके बाद कटिहार में 38 फीसदी, अररिया में 32 फीसदी, पूर्णिया में 30 फीसदी मुसलमान वोटर्स हैं। साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के जरिए राजद-कांग्रेस की कोशिश इन वोटों को पाने और बहुसंख्यकों को डराने की है।

श्री पाण्डेय ने कहा कि मुस्लिम लीग से केरल में गठजोड़ कर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस और उसके साथ रहने वाले राजद का मंसूबा सीमांचल को अशांत कर विद्वेष की आग में झोंकना है। इसलिए उसे कट्टरपंथी और भड़काऊ भाषण देकर समाज में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने वाले ओवैसी का साथ चाहिए।
श्री पाण्डेय ने कहा कि एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुदीन ओवैसी की छवि कट्टरपंथी नेता की है। वे अपनी कट्टर छवि और आक्रामक भाषण के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में राजद-कांग्रेस का यह सोचना है कि अगर ओवैसी की पार्टी महागठबंधन का हिस्सा बनती हैं तो मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण होगा। ऐसे में बहुसंख्यक वोटरों को सचेत रहने की जरूरत है।











