भारतीय राजनीति में 25 जून एक ऐतिहासिक तिथि है, ऐतिहासिक तथ्य है। 25 जून शब्द देखते ही दिमाग में आपातकाल की याद आ जाती है। इसी दिन 1975 में देश में आपातकाल लागू किया गया था। नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था। इस घटना के विरोध में खड़े हुए आंदोलन ने देश में सरकार बदल दी थी। इंदिरा गांधी की जगह मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने थे। इस पूरे प्रकरण का एक लंबा इतिहास है।

भारतीय इतिहास में एक दूसरा 25 जून भी दर्ज है। इस 25 जून की व्यापकता और विशालता के आगे आपातकाल वाला 25 जून बौना हो जाता है। दूसरा 25 जून है 1931 का। इस दिन विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्मदिन है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री। मंडल आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन की शुरुआत विश्वनाथ प्रताप सिंह ने की थी। मंडल आयोग की कुछ सिफारिशों को ही अब तक लागू किया गया है। लेकिन इन कुछ सिफारिशों के लागू करने से ही भारतीय समाज की व्यवस्था की जड़ता काफी हद तक जकड़न मुक्त हुई। समाज के निचले सोपान पर बैठा व्यक्ति के अंदर भी शीर्ष पर पहुंचने की भूख पैदा हुई और अब पहुंच भी रहे हैं।
विश्वनाथ प्रताप सिंह एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि एक बदलाव के नायक थे। एक ऐसा बदलाव जिनसे प्रशासनिक तंत्र का चेहरा बदल दिया, सामाजिक तंत्र का कायाकल्प कर दिया। ओबीसी जमात के युवाओं के सपनों को सांतवें आसमान पर पहुंचा दिया। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपनी सरकार की शहादत की कीमत पर केंद्र सरकार की नौकरियों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी। इसके बाद आरक्षण विरोधियों ने देश को आग के हवाले कर दिया। लेकिन इस आग से एक ऐसा समाज निकलकर सामने आया, जिसने एक झटके में बदलाव के कई परतों को अनावृत्त कर दिया।
राजनीति का हर फैसला एक परिस्थिति की उपज होता है। ऐसे फैसलों का असर बहुआयामी होता है। 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा का असर दीर्घकालिक हुआ है। एक छोटे से उदाहरण से इसे समझ सकते हैं। लालू यादव जब 1990 में मुख्यमंत्री बने थे तो बिहार में सिर्फ 2 यादव आईएएस थे। दोनों प्रमोटी थे। अन्य ओबीसी जातियों की हालत आसानी से समझ सकते हैं। लेकिन आरक्षण का असर था कि एक बार एक साथ बिहार में 6 डीएम यादव थे। इसे आप ओबीसी की अन्य जातियों के संदर्भ में भी देख-समझ सकते हैं। डीएम बनने के लिए आईएएस होना जरूरी है।
इसका श्रेय विश्वनाथ प्रताप सिंह की ओबीसी को 27 प्रतिशत वाली घोषणा को ही जाता है। उन्हीं वीपी सिंह की जयंती 25 जून को है। वीरेंद्र यादव फाउंडेशन और वीरेंद्र यादव न्यूज ने दो महीने पहले ही 25 जून को विश्वनाथ प्रताप सिंह की जयंती रोहतास जिले के राजपुर में मनाने का निर्णय लिया था। हमने 26 अप्रैल को राजपुर के चौधरी चरण सिंह महाविद्यालय में मुखिया एवं पैक्स अध्यक्षों की जाति डायरेक्टरी का लोकार्पण किया था। उसी कॉलेज में वीपी सिंह की जयंती भी मनानी थी। गर्मी के अवकाश और परीक्षाओं के कारण वहां यह कार्यक्रम करना संभव नहीं हो रहा था। इसलिए हमने पटना में जयंती के मौके पर विश्वनाथ प्रताप सिंह स्मृति उत्सव का आयोजन करने का निर्णय लिया। 25 जून को इसका आयोजन सुगना मोड़ के पास प्रेरणा आईएएस, कुटंबकम गेस्ट हाउस के सभागार किया जा रहा है।
हमने 25 जून की तिथि पर दो ऐतिहासिक महत्व की घटनाओं की चर्चा की। हमारे लिए आपातकाल की स्याह यादों से ज्यादा मंडल आयोग की धवल यात्रा की स्मृतियां महत्वपूर्ण हैं। 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की घोषणा यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसके बाद कुछ अन्य घोषणाओं को भी लागू किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में विश्वनाथ प्रताप सिंह का योगदान ऐतिहासिक और अतुलनीय रहा है। हम उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए यह आयोजन कर रहे हैं।











