सामाजिक संस्था Birendra Yadav Foundation और मासिक पत्रिक वीरेंद्र यादव न्यूज के तत्वावधान में पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की जयंती 25 जून को मनायी गयी। वीपी सिंह स्मृति उत्सव का आयोजन प्रेरणा आईएएस, सगुना, पटना के सभागार में किया गया। अध्यक्षता प्रेरणा आईएएस के समन्वयक लालटून यादव ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार हेमंत ने किया।

इस मौके पर Birendra Yadav Foundation के अध्यक्ष और पत्रकार वीरेंद्र यादव ने आयोजन के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वनाथ प्रताप सिंह के एक निर्णय से भारतीय समाज की सदियों की जड़ता एक झटके में ध्वत हो गयी। उन्होंने कहा कि विश्वनाथ प्रताप सिंह एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि एक बदलाव के नायक थे। एक ऐसा बदलाव जिनसे प्रशासनिक तंत्र का चेहरा बदल दिया, सामाजिक तंत्र का कायाकल्प कर दिया। ओबीसी जमात के युवाओं के सपनों को सांतवें आसमान पर पहुंचा दिया। वीरेंद्र यादव ने कहा कि विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपनी सरकार की शहादत की कीमत पर केंद्र सरकार की नौकरियों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी। इसके बाद आरक्षण विरोधियों ने देश को आग के हवाले कर दिया। लेकिन इस आग से एक ऐसा समाज निकलकर सामने आया, जिसने एक झटके में बदलाव के कई परतों को अनावृत्त कर दिया।

उत्सव को संबोधित करते हुए नेशनल दस्तक के संपादक शंभु सिंह ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ने के साथ ही सांस्कृतिक चेतना का समृद्ध होना भी जरूरी है। इसके लिए वैचारिक आंदोलनों की निरंतरता जरूरी है। उन्होंने कहा कि कबीर की परंपरा को आगे बढ़ाकर की सांस्कृतिक आंदोलनों को मजबूत बनाया जा सकता है।
इंजीनियर संतोष यादव ने कहा कि वीपी सिंह ने ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा करके बदलाव की धारा और धारणा को एक नयी दिशा दी, नयी गति दी। उन्हीं की देन है कि आज भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में ओबीसी एक अनिवार्य सच्चाई बन गयी है। उन्होंने कहा कि अब आरएसएस और भाजपा जैसी संस्था–पार्टी को अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए ओबीसी सरोकार की बात करनी पड़ रही है, ओबीसी चेहरा आगे करना पड़ रहा है।
स्त्रीकाल के संपादक संजीव चंदन ने कहा कि विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आंदोलन की एक सिफारिश को लागू किया। इसने सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी के दरवाजे ओबीसी के लिए खोल दिये, जबकि शिक्षामंत्री के रूप में अर्जुन सिंह ने शैक्षणिक संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण लागू इस वर्ग के लिए बेहतर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त कर दिया। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत ने कहा कि मंडल आयोग की अनुशंसा लागू करने के कारण विश्वनाथ प्रताप सिंह अपने ही जाति वर्ग में खलनायक बन गये, लेकिन उनका निर्णय भारतीय समाज व्यवस्था को अंदर तक हिस्सा दिया। ओबीसी आरक्षण से इस वर्ग का सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व बढ़ा। बदला हुआ चेहरा अब साफ-साफ दिखने भी लगा है। छात्र नेता गौतम आनंद ने भी इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वीपी सिंह ने मंडल आयोग की अनुशंसा लागू करने की शुरुआत की थी। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते अर्जुन सिंह ने शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का प्रावधान किया। ये दोनों नेता ओबीसी समाज के सबसे बड़े हितैषी थे और उन्हें इसी रूप में याद किया जाना भी चाहिए। युवा नेता सूरज यादव ने भी अपनी राय रखी। इस मौके पर अरुण आनंद, नरेंद्र यादव, रंजीत कुमार, रणविजय सिंह, दीपक आदि मौजूद थे।











