कुर्मिस्तान यानी नालंदा का जिला मुख्यालय है बिहारशरीफ। यहां पिछले 20 वर्षों से कुर्मी की छाती पर कोईरी की फसल लहलहा रही है। यह अर्द्धशहरी क्षेत्र है। इस विधान सभा क्षेत्र में बिहारशरीफ नगर निगम के सभी वार्ड और रहुई प्रखंड की सभी पंचायत आती हैं। हमारी पुस्तक ‘राजनीति की जाति पार्ट-2’ में संकलित आंकड़ों के अनुसार, बिहारशरीफ विधान सभा क्षेत्र में कुर्मी वोटरों की संख्या सबसे अधिक करीब 60 हजार है, जबकि कोईरी वोटरों की संख्या 42 हजार है। यादव और मुसलमान वोटरों की संख्या लगभग बराबर है 40-40 हजार। बिहार की सभी 243 विधान सभा क्षेत्रों की 10 प्रमुख जातियों के वोटरों की संख्या का डाटा हमारी पुस्तक ‘राजनीति की जाति पार्ट-2’ में मिल जाएगी। इसमें पिछले पांच वर्षों के राजनीति घटनाक्रम और चुनाव से जुड़े काफी सामग्री एक जगह मिल जाएगी। किसी को विधान सभा चुनाव लड़ने की इच्छा हो तो पुस्तक खरीद कर पढ़ सकते हैं। इसकी कीमत 5500 (पचपन सौ) रुपये है। पुस्तक की बुकिंग एडवांस पेमेंट पर जारी है। इसके लिए 9199910924 पर सपंर्क किया जा रहा है।

हम बिहारशरीफ की बात कर रहे थे। डा. सुनील 2005 से लगातार पांचवीं बार विधायक रहे हैं। 2010 में वे तीसरी बार जदयू के टिकट पर निर्वाचित हुए थे, जबकि 2015 के चुनाव के पहले भाजपा के साथ चले गये थे। दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू की पराजय के बाद नीतीश कुमार के कई विश्वस्त नये विकल्प की तलाश में जुट गये थे। वैसे लोगों में डा. सुनील कुमार भी शामिल थे। 2014 में राज्य सभा के लिए हुए उपचुनाव में जदयू के करीब 20 विधायकों ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था। जीतनराम मांझी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जदयू के कुछ विधायकों में आक्रोश था, जो बाद में समय पाकर विद्रोह में तब्दील हो गया था। सुनील उन्हीं परिस्थितियों में भाजपा में शामिल हो गये थे। हमने उस समय की स्थिति पर बात करने के लिए सुनील कुमार से संपर्क भी किया, लेकिन उनका फोन बराबर व्यस्त ही मिला।

सुनील कुमार फिलहाल राज्य सरकार में मंत्री हैं। सुनील के समक्ष मंत्री बनने के बाद लोगों की अपेक्षाओं की चुनौती है। भाजपा उम्मीदवार के रूप में धार्मिक गोलबंदी का उन्हें लाभ मिलता रहा है। पिछले दो चुनाव में उन्होंने बड़ी मार्जिन से जीत हासिल की। 2015 में उन्होंने जदयू के असगर शमीम और 2020 में राजद के सुनील गुप्ता को पराजित किया था।
बिहारशरीफ में राजनीतिक चर्चा के अनुसार, भाजपा की ओर से फिर वही उम्मीदवार होंगे। लेकिन विपक्ष में कौन होगा, इसको लेकर चर्चा तेज हो गयी है। पूर्व सांसद विजय कुमार यादव के भतीजा और सामाजिक कार्यकर्ता मनीष यादव राजद की ओर से प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। वे राजद के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भी रहे हैं। वे अपने सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों को लेकर भी लोगों में लोकप्रिय माने जा रहे हैं। इसके अलावा भी एनडीए और महागठबंधन की ओर से कई दावेदार मैदान में फेरी लगा रहे हैं। लेकिन माना जा रहा है कि इस बार बिहारशरीफ में यादव बनाम कोईरी की भिड़ंत होगी। महागठबंधन इस बार धार्मिक ध्रुवीकरण को जातीय गोलबंदी से साधने का प्रयास कर रहा है। सुनील कुमार के समक्ष चुनौती अपनी सीट बचाने की होगी, जबकि राजद उम्मीदवार के समक्ष सुनील कुमार को शिकस्त देने की चुनौती होगी।
तस्वीर : सुनील कुमार एवं मनीष यादव











