सोमवार को दोपहर बाद हम हाईकोर्ट जा रहे थे। रास्ते में साप्ताहिक पत्रिका ‘मुखियाजी’ के संपादक राजेश ठाकुर का फोन आया। उन्होंने कहा कि विधान सभा चलना है, हम भी आ रहे हैं। प्रांरभ हमने टालने की कोशिश की, लेकिन फिर सहमति जता दी। हम लोग भाजपा कार्यालय के पास मिले। बादल के बबाल की आशंका थी। हमने कहा कि मौसम खराब हो रहा है। हम फुलवारी चलें, आप भी कंकड़बाग की राह पकडि़ए। लेकिन बात नहीं बनी और एक ऑटो पर सवार होकर विधान सभा के लिए चल पड़े।

आरब्लॉक के आगे पेट्रोल पंप के पास ऑटो से उतर कर पैदल की विधान की ओर चल पड़े। कुछ दूर पुल के नीचे-नीचे चलने के बाद ओट से बाहर आये तो पानी भी तेज हो गया। इस कारण पुल के नीचे ही सड़क पर खड़ा होकर गप करने लगे। इसी बीच एक और साथी भी आ गये। पानी का फब्बारा थोड़ा कम हुआ तो विधान सभा की ओर बढ़े। रास्ते में फिर पानी का फब्बारा तेज हो गया। हम दोनों अपने-अपने झोले से माथा तोप कर आगे बढ़े जा रहे थे। इससे कपार बच रहा था, लेकिन कपड़ा भींगता जा रहा था। जब हम विधान सभा के गेट पर पहुंचे तो राजेश ठाकुर ने कहा कि छाता होता तो बढि़या रहता। उनकी यह बात सुनकर दिमाग ठनका। छाता तो हम अपने बैग में रखे ही हैं। हमने कहा- इसी को कहते हैं गोवार की मूर्खता। बैग में छाता रखकर भींगते जा रहे हैं। छाता निकालकर उसको सरकाया और फिर आगे बढ़े लिये। रास्ते में अपनी मूर्खता के प्रमाण के लिए एक तस्वीर भी मोबाइल में उतारी।
विधान सभा की लॉबी में कांग्रेस के एक नेता से मुलाकात हो गयी। विधायक हैं। लॉबी में ही बैठकर बातचीत होने लगी। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों कांग्रेस के दिल्ली मुख्यालय में एक ट्रेनिंग का आयोजन किया गया था कांग्रेस नेताओं के लिए। उन्होंने बताया कि इस ट्रेनिंग में इस बात पर फोकस किया गया कि नेरेटिव कैसे गढ़ा जाता है और फिर उस पर फोकस और रिपिटेशन की स्ट्रेजी पर चर्चा हुई। पार्टी की नयी रणनीति के अनुसार, भाजपा के मुद्दों का काउंटर नहीं करना है, उसके एजेंडों को अनदेखी करना है। इसके साथ ही अपना एजेंडा चलाना है, अपना नेरेटिव गढ़ना है। उन्होंने बताया कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ‘चौकीदार चोर है’ वाला नेरेटिव को ट्रेनिंग के दौरान सही नहीं माना गया। पिछले अनुभवों और रणनीतिक विफलता पर गंभीर मंथन किया गया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में ‘पे टीएम सीएम’ वाला नेरेटिव काफी सफल रहा था। इससे तत्कालीन मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार को स्थापित करने में काफी मदद मिली थी। उनका मानना है कि कांग्रेस आर्थिक तंगी का सामना कर रही है। इसका असर भी पार्टी की गतिविधियों पर पड़ रहा है। इसके बावजूद पार्टी लोकसभा चुनाव को लेकर पूरी रणनीति बनाकर काम कर रही है। सहयोगी पार्टियों के साथ समन्वय पर खास ध्यान दिया जा रहा है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम से नवगठित महागठबंधन ‘इंडिया’ को नयी ताकत मिली है और इसका असर भी दिखेगा।










